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वाल्मीकि रामायण 55.8

समासाद्य तु तम् वृक्षम् वसेद्वातिक्रमेत वा ।
क्रोशमात्रम् ततो गत्वा नीलम् द्रक्ष्यथ काननम् ॥२-५५-८॥

पूरा अध्याय