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वाल्मीकि रामायण 54.29

गो लान्गूल अनुचरितः वानर ऋष्क निषेवितः ।
चित्र कूटैति ख्यातः गन्ध मादन सम्निभः ॥२-५४-२९॥

पूरा अध्याय