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वाल्मीकि रामायण 54.18

नानाविधानन्नरसान् वन्यमूलफलाश्रयान् ।
तेभ्यो ददौ तप्ततपा वासम् चैवाभ्यकल्पयत् ॥२-५४-१८॥

पूरा अध्याय