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वाल्मीकि रामायण 54.11

स प्रविश्य महात्मानमृषिम् शिष्यगणैर्वऋतम् ।
सम्शितव्रतमेकाग्रम् तपसा लब्धचक्षुषम् ॥२-५४-११॥

पूरा अध्याय