ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 5353.6वाल्मीकि रामायण 53.6ध्रुवम् अद्य महा राजो दुह्खम् स्वपिति लक्ष्मण । कृत कामा तु कैकेयी तुष्टा भवितुम् अर्हति ॥२-५३-६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय