ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 5353.33वाल्मीकि रामायण 53.33ततस्तत्र सुखासीने नातिदूरे निरीक्ष्य ताम् । न्यग्रोधे सुकृताम् शय्याम् भेजाते धर्मवत्सलौ ॥२-५३-३३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय