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वाल्मीकि रामायण 52.81

ततः तैः चोदिता सा नौः कर्ण धार समाहिता ।
शुभ स्फ्य वेग अभिहता शीघ्रम् सलिलम् अत्यगात् ॥२-५२-८१॥

पूरा अध्याय