ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 5252.72वाल्मीकि रामायण 52.72अप्रमत्तः बले कोशे दुर्गे जन पदे तथा । भवेथा गुह राज्यम् हि दुरारक्षतमम् मतम् ॥२-५२-७२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय