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वाल्मीकि रामायण 52.7

तम् निशम्य समादेशम् गुहामात्यगणो महान् ।
उपोह्य रुचिराम् नावम् गुहाय प्रत्यवेदयत् ॥२-५२-७॥

पूरा अध्याय