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वाल्मीकि रामायण 52.66

नेदानीम् गुह योग्योऽयम् वसो मे सजने वने ।
अवश्यम् ह्याश्रमे वासह् कर्तव्यस्तद्गतो विधिः ॥२-५२-६६॥

पूरा अध्याय