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वाल्मीकि रामायण 52.51

तत् कृतेन मया प्राप्तम् रथ चर्या कृतम् सुखम् ।
आशम्से त्वत् कृतेन अहम् वन वास कृतम् सुखम् ॥२-५२-५१॥

पूरा अध्याय