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वाल्मीकि रामायण 52.48

तन्न शक्ष्याम्यहम् गन्तुमयोध्याम् त्वदृतेऽनघ ।
वनवासानुयानाय मामनुज्ञातुमर्हसि ॥२-५२-४८॥

पूरा अध्याय