ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 5252.41वाल्मीकि रामायण 52.41दैन्यम् हि नगरी गच्चेद् दृष्ट्वा शून्यम् इमम् रथम् । सूत अवशेषम् स्वम् सैन्यम् हत वीरम् इव आहवे ॥२-५२-४१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय