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वाल्मीकि रामायण 52.22

इक्ष्वाकूणाम् त्वया तुल्यम् सुहृदम् न उपलक्षये ।
यथा दशरथो राजा माम् न शोचेत् तथा कुरु ॥२-५२-२२॥

पूरा अध्याय