Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 52.100

गतम् तु गन्गा पर पारम् आशु ।
रामम् सुमन्त्रः प्रततम् निरीक्ष्य ।अध्व प्रकर्षात् विनिवृत्त दृष्टिर् ।र्मुमोच बाष्पम् व्यथितः तपस्वी ॥२-५२-१००॥

पूरा अध्याय