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वाल्मीकि रामायण 50.25

विष्णुपादच्युताम् दिव्यामपापाम् पापनाशिनीम् ।
ताम् शङ्करजटाजूटाद्भ्रष्टाम् सागरतेजसा ॥२-५०-२५॥

पूरा अध्याय