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वाल्मीकि रामायण 50.22

व्यपेतमलसम्घाताम् मणिनिर्मलदर्शनाम् ।
दिशागजैर्वनगजैर्मत्तैश्च वरवारणैः ॥२-५०-२२॥

पूरा अध्याय