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वाल्मीकि रामायण 50.20

क्वचित्तीररुहैर्वृक्षैर्मालाभिरिव शोभिताम् ।
क्वचित्फुल्लोत्पलच्छन्नाम् क्वचित्पद्मवनाकुलाम् ॥२-५०-२०॥

पूरा अध्याय