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वाल्मीकि रामायण 5.7

अभ्येत्य त्वरमाणश्च रथाभ्याशं मनीषिणः ।
ततोऽवतारयामास परिगृह्य रथात्स्वयम् ॥२-५-७॥

पूरा अध्याय