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वाल्मीकि रामायण 5.25

गुरुणा त्वभ्यनुज्ञातो मनिजौघं विसृज्य तम् ।
विवेशान्तःपुरं राजा सिंहो गिरिगुहामिव ॥२-५-२५॥

पूरा अध्याय