Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 5.18

सिक्तसंमृष्टरथ्या हि तदहर्वनमालिनी ।
आसीदयोध्या नगरी समुच्छ्रितगृहध्वजा ॥२-५-१८॥

पूरा अध्याय