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वाल्मीकि रामायण 5.15

स राजभवनप्रख्यात्तस्माद्रामनिवेशनात् ।
निर्गत्य ददृशे मार्गं वसिष्ठो जनसंवृतम् ॥२-५-१५॥

पूरा अध्याय