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वाल्मीकि रामायण 49.8

अहो दशरथो राजा निस्नेहः स्वसुत प्रियम् ।
प्रजानामनघम् रामम् परित्यक्तुमिहेच्छति ॥२-४९-८॥

पूरा अध्याय