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वाल्मीकि रामायण 49.5

हा नृशम्स अद्य कैकेयी पापा पाप अनुबन्धिनी ।
तीक्ष्णा सम्भिन्न मर्यादा तीक्ष्णे कर्मणि वर्तते ॥२-४९-५॥

पूरा अध्याय