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वाल्मीकि रामायण 48.37

प्रशान्तगीतोत्सव नृत्तवादना ।
व्यपास्तहर्षा पिहितापणोदया ।तदा ह्ययोध्या नगरी बभूव सा ।महार्णवः सम्क्षपितोदको यथा ॥२-४८-३७॥

पूरा अध्याय