ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 4545.27वाल्मीकि रामायण 45.27याचितः नो निवर्तस्व हम्स शुक्ल शिरः रुहैः । शिरोभिर् निभृत आचार मही पतन पाम्शुलैः ॥२-४५-२७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय