ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 4444.6वाल्मीकि रामायण 44.6अरण्य वासे यद् दुह्खम् जानती वै सुख उचिता । अनुगच्चति वैदेही धर्म आत्मानम् तव आत्मजम् ॥२-४४-६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय