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वाल्मीकि रामायण 44.29

अभिवाद्य नमस्यन्तम् शूरम् ससुहृदम् सुतम् ।
मुदास्रैः प्रोक्ष्यसि पुनर्मेघराजि रिवाचलम् ॥२-४४-२९॥

पूरा अध्याय