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वाल्मीकि रामायण 44.22

शिरसा चरणावेतौ वन्दमानमनिन्दिते ।
पुनर्द्रक्ष्यसि कल्याणि! पुत्रं चन्द्रमिवोदितम् ॥२-४४-२२॥

पूरा अध्याय