ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 4242.22वाल्मीकि रामायण 42.22इति एवम् विलपन् राजा जन ओघेन अभिसम्वृतः । अपस्नातैव अरिष्टम् प्रविवेश पुर उत्तमम् ॥२-४२-२२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय