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वाल्मीकि रामायण 41.10

व्यसृजन् कबलान्नागा गावो वत्सान्न पाययन् ।
पुत्रम् प्रथमजम् लब्ध्वा जननी नाभ्यनन्दत ॥२-४१-१०॥

पूरा अध्याय