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वाल्मीकि रामायण 40.43

प्रत्यगारमिवायान्ती वत्सला वत्सकारणात् ।
बद्धवत्सा यथा धेनू राममाताभ्याधावत ॥२-४०-४३॥

पूरा अध्याय