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वाल्मीकि रामायण 40.36

दृष्ट्वा तु नृपतिः श्रीमानेकचित्तगतम् पुरम् ।
निपपातैव दुःखेन हतमूल इव द्रुमः ॥२-४०-३६॥

पूरा अध्याय