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वाल्मीकि रामायण 39.41

मुरज पणव मेघ घोषव ।
द्दशरथ वेश्म बभूव यत् पुरा ।विलपित परिदेवन आकुलम् ।व्यसन गतम् तत् अभूत् सुदुह्खितम् ॥२-३९-४१॥

पूरा अध्याय