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वाल्मीकि रामायण 39.34

अम्ब मा दुह्खिता भूस् त्वम् पश्य त्वम् पितरम् मम ।
क्षयो हि वन वासस्य क्षिप्रम् एव भविष्यति ॥२-३९-३४॥

पूरा अध्याय