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वाल्मीकि रामायण 37.9

अथ आत्म परिधान अर्थम् सीता कौशेय वासिनी ।
समीक्ष्य चीरम् सम्त्रस्ता पृषती वागुराम् इव ॥२-३७-९॥

पूरा अध्याय