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वाल्मीकि रामायण 37.7

स चीरे पुरुष व्याघ्रः कैकेय्याः प्रतिगृह्य ते ।
सूक्ष्म वस्त्रम् अवक्षिप्य मुनि वस्त्राणि अवस्त ह ॥२-३७-७॥

पूरा अध्याय