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वाल्मीकि रामायण 36.28

अथवा देवि दोषम् त्वं कंचित्पश्यसि राघवे ।
तमद्य ब्रूहि तत्वैन तदा रोमो विवास्यताम् ॥२-३६-२८॥

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