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वाल्मीकि रामायण 36.14

वहन्तम् किम् तुदसि माम् नियुज्य धुरि मा आहिते ।
अनार्ये कृत्यमार्ब्धम् किम् न पूर्वमुपारुधः ॥२-३६-१४॥

पूरा अध्याय