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वाल्मीकि रामायण 36.12

राज्यम् गत जनम् साधो पीत मण्डाम् सुराम् इव ।
निरास्वाद्यतमम् शून्यम् भरतः न अभिपत्स्यते ॥२-३६-१२॥

पूरा अध्याय