ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 3535.33वाल्मीकि रामायण 35.33परिवादो हि ते देवि महान्लोके चरिष्यति । यदि रामो वनम् याति विहाय पितरम् नृपम् ॥२-३५-३३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय