Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 35.27

तथा त्वमपि राजानम् दुर्जनाचरिते पथि ।
असद्ग्राहमिमम् मोहात्कुरुषे पापदर्शिनि ॥२-३५-२७॥

पूरा अध्याय