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वाल्मीकि रामायण 34.36

न चैतन्मे प्रियम् पुत्र शपे सत्येन राघव ।
छन्नया छलितस्त्वस्नु स्त्रुया छन्नाग्निकल्पया ॥२-३४-३६॥

पूरा अध्याय