ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 3333.18वाल्मीकि रामायण 33.18समुद्धृत निधानानि परिध्वस्त अजिराणि च । उपात्त धन धान्यानि हृत साराणि सर्वशः ॥२-३३-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय