ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 3030.6वाल्मीकि रामायण 30.6द्युमत्सेन सुतम् वीर सत्यवन्तम् अनुव्रताम् । सावित्रीम् इव माम् विद्धि त्वम् आत्म वश वर्तिनीम् ॥२-३०-६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय