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वाल्मीकि रामायण 30.33

अस्वाधीनम् कथम् दैवम् प्रकारैरभिराध्यते ।
स्वाधीनम् समतिक्रम्य मातरम् पितरम् गुरुम् ॥२-३०-३३॥

पूरा अध्याय