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वाल्मीकि रामायण 30.3

किम् त्वा अमन्यत वैदेहः पिता मे मिथिला अधिपः ।
राम जामातरम् प्राप्य स्त्रियम् पुरुष विग्रहम् ॥२-३०-३॥

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