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वाल्मीकि रामायण 30.24

तस्याः स्फटिक सम्काशम् वारि सम्ताप सम्भवम् ।
नेत्राभ्याम् परिसुस्राव पन्कजाभ्याम् इव उदकम् ॥२-३०-२४॥

पूरा अध्याय