ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 3030.12वाल्मीकि रामायण 30.12कुश काश शर इषीका ये च कण्टकिनो द्रुमाः । तूल अजिन सम स्पर्शा मार्गे मम सह त्वया ॥२-३०-१२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय