Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 30.10

स माम् अनादाय वनम् न त्वम् प्रस्थातुम् अर्हसि ।
तपो वा यदि वा अरण्यम् स्वर्गो वा स्यात् सह त्वया ॥२-३०-१०॥

पूरा अध्याय